जज लोया की मौत: प्रतिष्ठित वकील का आरोप, रवि भवन के उपस्थिति रजिस्टर के साथ की गई छेड़छाड़ जिसमें जज के प्रवास संबंधी विवरण दर्ज था

29 December 2017
मरहूम जज के लिए कई परिजनों और सहयोगियों ने उनकी मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि लोया ने उन्हेंत बताया था कि सोहराबुद्दीन शेख के मामले में उनके फैसले को प्रभावित करने की कोशिशें की जा रही थीं और ऐसा करने वालों में बॉम्बेउ हाइकोर्ट के तत्काोलीन मुख्यथ न्याहयाधीश मोहित शाह भी शामिल थे।

वकील मिलिंद पखाले ने पुलिस में एक शिकायत दर्ज करायी है कि नागपुर के सरकारी अतिथि गृह रवि भवन के रजिस्‍टर में उन्‍होंने जो प्रविष्टि की थी, उससे छेड़छाड़ की गई है। पखले एक प्रतिष्ठित शख्‍स हैं और महाराष्‍ट्र के खैरलांजी में 2006 में हुए दलितों के नरसंहार के बाद गठित खैरलांजी ऐक्‍शन कमेटी के संयोजक हैं। जज बृजगोपाल हरकिशन लोया, जिनकी मौत 30 नवंबर और 1 दिसंबर 2014 की दरमियानी रात नागपुर के दौरे पर अचानक हुई थी, वे आखिरी रात को कथित रूप से रवि भवन में ही ठहरे हुए थे। रजिस्‍टर में पखाले की प्रविष्टि लोया के ठहरने से जुड़ी दो प्रविष्टियों के ठीक पहले दर्ज है।

अपनी मौत के वक्‍त लोया सोहराबुद्दीन शेख के कथित फर्जी मुठभेड़ हत्‍याकांड के मामले की सुनवाई कर रहे थे जिसमें मुख्‍य आरोपी भारतीय जनता पार्टी के मौजूदा अध्‍यक्ष अमित शाह थे। द कारवां द्वारा प्रकाशित रिपोर्टों में मरहूम जज के लिए कई परिजनों और सहयोगियों ने उनकी मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि लोया ने उन्‍हें बताया था कि सोहराबुद्दीन शेख के मामले में उनके फैसले को प्रभावित करने की कोशिशें की जा रही थीं और ऐसा करने वालों में बॉम्‍बे हाइकोर्ट के तत्‍कालीन मुख्‍य न्‍यायाधीश मोहित शाह भी शामिल थे।

पखाले ने 20 दिसंबर 2017 को नागपुर के सदर थाने में शिकायत दर्ज करवायी है। उन्‍होंने शिकायत की प्रति लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता को भी भेजी है, जो रवि भवन का संचालन करता है। नागपुर पुलिस ने शिकायत प्राप्‍त होने की पुष्टि द कारवां से की है। कार्यकारी अभियंता ने द कारवां को बताया कि वे इस मामले को इसलिए नहीं देख पाए क्‍योंकि असेंबली का सत्र चल रहा था और वे क्रिसमस के बाद ही इसे देख पाएंगे।

पुलिस में की गई शिकायत कहती है, ”किसी ने 30.11.2014 को हुई जघन्‍य घटना के संबंध में सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की है जिसका उद्देश्‍य मेरे पंजीकरण के साक्ष्‍य को मिटाना था और इसके लिए दस्‍तावेज़ में हेरफेर कर के एक फर्जी काग़ज़ का इस्‍तेमाल किया गया।पखाले का कहना है कि उन्‍होंने अपने हाथ से 2014 की वह एंट्री की थी लेकिन आज वही एंट्री उसी रजिस्‍टर में आगमन और प्रस्‍थान की तारीख की जगह 2017 दर्शा रही है और हाथ की लिखावट भी किसी और की है। उनका कहना है कि आगमन और प्रस्‍थान की तारीख के अलावा बाकी प्रविष्टि उन्‍हीं की लिखावट में अब भी दर्ज है। पखाले लिखते हैं, ”मैं यह शिकायत दर्ज करवाते हुए इस हेरफेर के लिए जिम्‍मेदार अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्‍काल जांच की मांग करता हूं।

जस्टिस लोया की रहस्‍यमय मौत में जांच की मांग को यह शिकायत और ताकत देती है। अब तक लोया के परिवरवालों, सहयोगियों, पूर्व सहकर्मियों आदि ने लगातार उनकी मौत की जांच की मांग उठायी है। हाल ही में कुछ अवकाश प्राप्‍त सम्‍मानित जजों, नौकरशाहों और सेना के अफसरों ने भी इस मामले में जांच की मांग की थी।

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