मौत से पहले जज लोया ने लॉ कॉलेज के अपने बैचमेट से कहा था: ''मैं इस्तीफ़ा देना चाहता हूं; गांव जाकर खेती कर लूंगा लेकिन एक गलत फैसला नहीं दूंगा''

02 December 2017
मरहूम जज के बैचमेट, वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता और बार असोसिएशन के पूर्व अध्‍यक्ष उदय गावरे ने याद करते हुए बताया कि लोया ने सोहराबुद्दीन केस की सुनवाई के दौरान उनके समक्ष ''दबाव में होने'' की बात कबूली थी।
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बीते 27 नवंबर को लातूर बार असोसिएशन के सदस्‍यों ने लातूर की जिला अदालत से जिला कलेक्‍टर के कार्यालय तक एक मार्च निकाला और जज लोया की मौत की जांच कराने संबंधी एक ज्ञापन सौंपा। द कारवां को दिए एक इंटरव्‍यू में मरहूम जज के बैचमेट, वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता और बार असोसिएशन के पूर्व अध्‍यक्ष उदय गवारे  ने याद करते हुए बताया कि सोहराबुद्दीन केस की सुनवाई के दौरान लोया ने उनके समक्ष ''दबाव में होने'' की बात स्‍वीकारी थी। गवारे कहते हैं कि उस दौर में ''मैंने पहली बार देखा कि बृजमोहनजी इतने ज्‍यादा तनाव में थे वरना वे आम तौर से खुशमिजाज़ रहते थे।''

मरहूम जज लोया लातूर के निवासी थे। वे वहां बार असोसिएशन के सदस्‍य रह चुके थे और दस साल वकालत कर चुके थे, जिसके बाद उनकी नियुक्ति जज के रूप में हुई। गवारे ने द कारवां को बताया कि कोर्ट की छुट्टियों के दौरान लोया लातूर आते थे और बार असोसिएशन के अपने पूर्व सहकर्मियों से बात करते थे। गवारे याद करते हैं कि 2014 की दिवाली में लोया जब लातूर आए तब उन्‍होंने कहा था कि सोहराबुद्दीन केस की सुनवाई में उन पर दबाव पड़ रहा है। गवारे के मुताबिक लोया ने कहा था, ''मैं इस्‍तीफा देना चाहता हूं। मैं गांव जाकर खेती कर लूंगा, लेकिन मैं गलत फैसला नहीं दूंगा।''

द कारवां को जानकारी मिली है कि लोया ने एक और वकील दोस्‍त से इस मसले पर काफी लंबी बातचीत की थी। उनके उस दोस्‍त से जब द कारवां ने संपर्क किया तो वे बोले, ''मेरे पास तमाम साक्ष्‍य यह दिखाने के लिए हैं कि उनके ऊपर दबाव था।'' लेकिन उन्‍होंने आगे कहा, ''मैं इस बारे में केवल किसी जांच अधिकारी के सामने मुंह खोलूंगा।''

लातूर बार असोसिएशन की आम सभा ने 25 नवंबर को संकल्‍प पारित किया कि उसने ''एकमत से निर्णय'' लिया है कि लोया की मौत से जुड़ी ''संदिग्‍ध परिस्थितियों'' में जांच की मांग की जाए। संकल्‍प में बार असोसिएशन ने जज की मौत की जांच ''सुप्रीम कोर्ट/हाइ कोर्ट के एक स्‍वतंत्र आयोग'' से करवाने की मांग की है। दो दिन बाद बार के सदस्‍यों ने जिला कलेक्‍टर के दफ्तर तक मार्च निकाला और भारत के राष्‍ट्रपति के नाम संबोधित एक ज्ञापन सौंपा।

Aathira Konikkara द कारवां में प्रशिक्षु हैं

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