अनुज लोया ने मोहित शाह का नाम लेने वाले उस पत्र की प्रति मुझे दिखाई थी जिसमें लिखा था, ''अगर कभी कुछ हो गया तो...'': कारवां को एक करीबी दोस्त का संदेश

02 December 2017
हमें 29 नवंबर को एक और मेल मिला जिसमें भेजने वाले ने खुद को अनुज लोया बताया था. हमने 2015 में अनुज के लिखे उस पत्र से इस पत्र के दस्तखत मिलाकर जांचा जो हम पहले एक स्टोरी में छाप चुके हैं. नए पत्र पर दस्तखत 90 अंश के कोण पर झुका हुआ था.

बीते 29 नवंबर को कारवां को एक ईमेल मिला. भेजने वाले ने खुद को मरहूम जज बीएच लोया के बेटे अनुज लोया का दोस्‍त बताया था. उसने लिखा है कि 30 नवंबर को उसकी अनुज से बातचीत हुई थी. अनुज ने उसे फरवरी 2015 को लिखे अपने उस पत्र की प्रति दिखाई थी जो जज लोया की बहन के पास उन्‍होंने छोड़ रखी थी. जज की मौत से जुड़ी संदिग्‍ध परिस्थितियों पर अपनी स्‍टोरी में कारवां ने यही पत्र प्रकाशित किया था. पत्र में लिखा था, ''यदि मुझे या मेरे परिवार के सदस्‍यों के साथ कुछ भी होता है, तो षडयंत्र में लिप्‍त मुख्‍य न्‍यायाधीश मोहित शाह और अन्‍य उसके लिए जिम्‍मेदार होंगे.'' जिस दोस्‍त ने कारवां से संपर्क किया था, उसे चिंता थी कि अनुज अब दबाव में है. उसने बताया कि अनुज ने उससे कहा था कि ''अगर उसके परिवार को कोई भी नुकसान होता है'' तो ''मीडिया या ऐसे किसी शख्‍स को जो कुछ कर पाने में सक्षम हो,'' इस पत्र के बारे में उसे खबर कर देनी चाहिए.

हमें 29 नवंबर को एक अन्‍य मेल मिला. भेजने वाले का दावा था कि वह अनुज लोया है. मेल से संलग्‍न एक पत्र में उसने लिखा है, ''मुझे, मेरी बहन और मेरी मां को इस तथ्‍य पर कोई संदेह नहीं कि मेरे पिता दिल का दौरा पड़ने से ही गुज़रे हैं, किसी दूसरी वजह से नहीं.'' हमने उसका जवाब देते हुए उसे अपनी पहचान पुष्‍ट करने को कहा, लेकिन अब तक उसका कोई जवाब नहीं आया है. इसीलिए हम अब तक यह पुष्‍ट नहीं कर सके हैं कि पत्र उसी ने भेजा था और उसमें उसकी भावनाएं ही व्‍यक्‍त थीं. जज लोया की मौत पर कारवां में छपी सिलसिलेवार कहानियों (जिसके बाद से लोया परिवार के कई सदस्‍य लापता हैं) के करीब हफ्ते भर बाद टाइम्‍स ऑफ इंडिया में एक खबर आई जिसमें बताया गया कि अनुज ने बॉम्‍बे उच्‍च न्‍यायालय की मुख्‍य न्‍यायाधीश मंजुला चेल्‍लूर से मिलकर यह बताया था कि ''परिवार को पिता की मौत की परिस्थितियों के बारे में कोई शिकायत या शुबहा नहीं है.'' इस खबर में यह नहीं बताया गया था कि अनुज ने मुख्‍य न्‍यायाधीश से कैसे संपर्क किया या कि किसने इस मुलाकात को मुमकिन बनाया.

हमने 2015 वाले पत्र और अभी मिले हालिया पत्र पर किए गए दस्‍तखत का मिलान किया. शुरुआत में यह जानकार थोड़ी परेशानी हुई कि दोनों अलग थे. करीब से देखने पर पता चला कि दोनों एक जैसे थे लेकिन नए पत्र पर किया गया दस्‍तखत करीब 90 अंश के कोण पर मुड़ा हुआ था. अनुज की एक फोटो हमने देखी जिसमें वे दाएं हाथ से पूल खेलते दिखते हैं. इसका मतलब कि वे संभवत: दाएं हाथ से ही सारे काम करते हैं. इससे यह पता चलता है कि दस्‍तखत करते वक्‍त नए वाले पत्र के ठीक सामने वे नहीं बैठे हुए थे बल्कि कुछ इस मुद्रा में बैठे थे कि दस्‍तखत करते वक्‍त उनकी बांह पन्‍ने के लम्‍बवत् थी.

उनके दोस्‍त के मुताबिक वे 4 नवंबर तक अनुज के संपर्क में रहे, ''जब उसने मुझे बताया कि उसका फोन टूट गया है. उसने मेरा नंबर मुझसे मांगा था.'' इस आखिरी संवाद तक अनुज ने अपने दोस्‍त को ऐसा कोई संकेत नहीं दिया था कि 2015 के पत्र में उसने जो भावनाएं ज़ाहिर की थीं वे बदल गई हैं या फिर वे उस चेतावनी को वापस ले रहे हैं जो उन्‍होंने पत्र में लिखी थी ''अगर कहीं कुछ हो जाए''. अब इस बात के तीन हफ्ते बाद कारवां को भेजी उनकी चिट्ठी में अनुज ने जो लिखा है, उसकी कोई संगति खोज पाना मुश्किल दिखता है, ''मैं अपने पिता के मित्रों, सहकर्मियों और बंबई उच्‍च न्‍यायालय के अन्‍य माननीय जजों द्वारा मेरे परिवार को दी गई सांत्‍वना की ईमानदारी को महसूस कर सकता हूं.''

दोस्‍त का ईमेल बताता है कि वह अनुज ओर उसके परिवार के अन्‍य लोगों से संपर्क करने की नाकाम कोशिश कर चुका था. उसने लिखा, ''मैं अनुज लोया का बहुत करीबी दोस्‍त हूं. मैंने उससे संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनके परिवार के किसी भी सदस्‍य का नंबर नहीं लग रहा है.'' (हमने दोस्‍त का नाम उसकी निजता और सुरक्षा के मद्देनज़र न छापने का निर्णय किया है). ईमेल आगे कहता है, ''मैं बस इतना जानना चाहता हूं कि मेरा दोस्‍त महफ़ूज़ है या नहीं औश्र इस बारे में कोई भी सूचना सराहनीय होगी.''

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