अयोध्या के नाराज साधु बढ़ा सकते हैं बीजेपी की मुश्किलें

06 October 2018
अयोध्या के तापसी छवानी मंदिर के महंत परमहंस दास 1 अक्टूबर से भूख हड़ताल कर रहे हैं. उनकी मांग है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संसद में कानून पारित कर राम मंदिर निमार्ण के अवरोधों को दूर करें.
अयोध्या के तापसी छवानी मंदिर के महंत परमहंस दास 1 अक्टूबर से भूख हड़ताल कर रहे हैं. उनकी मांग है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संसद में कानून पारित कर राम मंदिर निमार्ण के अवरोधों को दूर करें.

लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को फिर से ताजा करना चाहती है. लेकिन शहर के साधु, जो बीजेपी का साथ देते रहें हैं, पार्टी की मंदिर नीति की हवा निकालते दिख रहे हैं. 5 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के संगठन विश्व हिन्दू परिषद ने राम मंदिर निर्माण का रोडमैम तैयार करने के घोषित उद्देश्य के साथ दिल्ली के कार्यालय में बैठक बुलाई. इस बैठक में परिषद से जुड़े 50 साधुओं ने हिस्सा लिया लेकिन अयोध्या के सिर्फ 5 साधु ही बैठक में उपस्थित थे.

मंदिर मुद्दे पर शहर के साधुओं ने वीएचपी से अलग अपना आंदोलन शुरू कर दिया है. रामघाट स्थित तापसी छावनी मंदिर के महंत परमहंस दास, मंदिर निर्माण की मांग को लेकर 1 अक्टूबर से भूख हड़ताल पर बैठे हैं. उनकी मांग है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संसद में कानून पास कर राम मंदिर निर्माण की सभी अड़चनों को दूर करें. मंदिर के पास भूख हड़ताल की जगह पर ढेरों साधु जमा होते हैं और बहुत से साधु बीजेपी के खिलाफ नारेबाजी करते हैं. साधुओं के आंदोलन ने वीएचपी के भीतर हड़कंप मचा दिया है और बीजेपी के सामने महत्वपूर्ण आधार के खिसक जाने का खतरा है.

चार साल से वीएचपी के सक्रिय समर्थक रहे परमहंस दास से मैंने फोन पर बात की. वह कहते हैं, ‘‘हमारी मांग बिल्कुल सरल है. कार्यकाल के खत्म होने से पहले बीजेपी मंदिर निर्माण के अपने चुनावी वादे को पूरा करे. हमें लगता है कि और अधिक प्रतीक्षा करने से कुछ मिलने-विलने वाला नहीं है. कुछ ही महीनों बाद चुनावी आचार संहिता लागू हो जाएगी और बीजेपी एक बार फिर राम मंदिर के निर्माण के वादे के साथ लोगों से वोट मांगेगी. इसलिए मैंने प्रतीक्षा न करने का निर्णय लिया है और भूख हड़ताल कर रहा हूं.’’

अयोध्या के सबसे शक्तिशाली निर्वाणी अखाड़ा के प्रमुख धरम दास का कहना है कि इस बवाल के लिए बीजेपी जिम्मेदार है. ‘‘मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है और बीजेपी, वीएचपी और आरएसएस के लोग मंदिर का मामला उठा कर अपना अभियान तीव्र कर रहे हैं. उन लोगों को पता है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक सरकार कुछ नहीं कर सकती, फिर भी लोगों की भावनाओं को भड़का रहे हैं. लेकिन साधुओं को हमेशा मूर्ख नहीं बनाया जा सकता. साधुओं को लगता है कि उनके साथ छल हुआ है.’’

उनका कहना है कि साधुओं के गुस्से के डर से वीएचपी खुले में मीटिंग तक नहीं कर सकी और उसे दिल्ली में अपनी मीटिंग बुलानी पड़ी. वीएचपी की केन्द्रीय समिति ‘केन्द्रीय मार्गदर्शक मंडल’ के सदस्य होने के बावजूद धरम दास ने दिल्ली की बैठक में भाग नहीं लिया.

Dhirendra K Jha is a journalist. He is the author of Shadow Armies: Fringe Organizations and Foot Soldiers of Hindutva and the co-author of Ayodhya: The Dark Night.

Keywords: लोक सभा चुनाव 2019
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